क्या आपको हो रही है 'इमोशनल थकान', पैरंट्स इन 6 संकेतों को न करें नजरअंदाज

पैरेंट्स अपने बच्चों के लिए जो करते हैं वे उसे कभी भी किसी काम या जॉब की तरह नहीं देखते.

बच्चों की परवरिश करना कोई आसान काम नहीं है. इससे काफी तनाव (Stress) भी जुड़ा होता है और अगर पालन पोषण से जुड़ा यह तनाव लंबे समय तक बना रहे तो इसकी वजह से कई माता-पिता हद से ज्यादा थकान और अक्रियाशीलता (बर्नआउट) के स्टेज तक पहुंच जाते हैं.

हो सकता है हर किसी को इस बात का अहसास न हो लेकिन पैरेंट्स (Parents) चाहे वर्किंग हों उनका अपना प्रोफेशनल करियर हो या न हो, हर माता-पिता को कई तरह के दबाव का सामना करना पड़ता है. पैरंट्स अपने बच्चों के लिए जो करते हैं वे उसे कभी भी किसी काम या जॉब (Job) की तरह नहीं देखते. लेकिन बच्चों का ध्यान रखना, उनकी शारीरिक (Physical), मानसिक (Mental), भावनात्मक (Emotional) और शिक्षा (Education) से जुड़ी जरूरतों को पूरा करना और साथ ही साथ उन्हें हमेशा स्वस्थ और सुरक्षित रखने की अपनी कोशिश में पैरंट्स को काफी मेहनत करनी पड़ती है. बच्चों की परवरिश करना कोई आसान काम नहीं है. इससे काफी तनाव (Stress) भी जुड़ा होता है और अगर पालन पोषण से जुड़ा यह तनाव लंबे समय तक बना रहे तो इसकी वजह से कई माता-पिता हद से ज्यादा थकान और अक्रियाशीलता (बर्नआउट) के स्टेज तक पहुंच जाते हैं.

सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि ज्यादातर पैरंट्स इस बात को समझ ही नहीं पाते कि पैरंटल बर्नआउट यानी बच्चों की परवरिश से जुड़ी थकान और अक्रियाशीलता हकीकत में होती है और इसके लिए भावनात्मक थकान को दोष दिया जा सकता है. आपको भले ही यह लगे भावनात्मक थकान कोई बड़ी बात नहीं है क्योंकि बहुत से पैरंट्स सोचते हैं कि उन्हें अपने बच्चों की जरूरतों और सुख को प्राथमिकता देनी है और वे अपनी जरूरतों पर बाद में विचार कर लेंगे.

स्कूल एंड चाइल्ड साइकॉलजिस्ट की गीतिका कपूर बताती हैं कि भावनात्मक थकान की वजह से न सिर्फ आपकी शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक सेहत पर बुरा असर पड़ता है बल्कि बच्चों का ध्यान रखने की आपकी क्षमता भी बुरी तरह से प्रभावित हो जाती है. लिहाजा अपनी जरूरतों को गैर-जरूरी समझकर नजरअंदाज करने की बजाए आपको एक बेहतर दृष्टिकोण की जरूरत है. गीतिका कपूर कहती हैं कि भावनात्मक थकान से निपटने के लिए सबसे जरूरी है कि आप उसके संकेतों को पहचानें कि आखिर वो है क्या.

ऐसे में हम आपको भावनात्मक थकान से जुड़े उन 6 संकेतों के बारे में बता रहे हैं जिसे किसी भी पैरंट को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:1. लंबे समय तक चिड़चिड़ापन महसूस होना
कभी-कभार ऐसा महसूस होना अलग बात है. लेकिन अगर आप जितनी देर जगे हुए हैं चिड़चिड़ापन आपके ऊपर हावी रहता है और खासकर छोटी-छोटी बातों पर आपको चिड़चिड़ापन महसूस होता है तो आप जरा ठहर जाएं. एक कदम पीछे लें और अपनी स्थिति और भावनाओं के बारे में सोचें कि आखिर आपके साथ क्या हो रहा है.

2. गुस्से का प्रकोप
भावनात्मक थकान अक्सर गुस्से के तौर पर प्रदर्शित होती है और यह इस बात का संकेत है कि आप दूसरों के साथ बातचीत नहीं करना चाहते और खुद को उनसे दूर करने की कोशिश कर रहे हैं. गुस्से में कुछ बोल देना या हाथ उठाना, निराशा और कुंठा का संकेत है. लिहाजा इससे पहले कि आपका गुस्सा किसी भयंकर स्थिति में पहुंच जाए आप अपनी इस समस्या को समझकर इसके समाधान के लिए कदम उठाएं.

3. भावनात्मक सुन्नता
जब आप भावनात्मक रूप से बहुत ज्यादा थक जाते हैं तो आप एक ऐसी स्थिति में पहुंच जाते हैं जहां आपको कुछ महसूस नहीं होता और आप भावनात्मक सुन्नता की स्थिति में होते हैं. इस तरह की स्थिति जहां आपको भावनात्मक रूप से कुछ महसूस ही न हो बेहद खतरनाक हो सकती है. लेकिन आपको यहां से वापस आने का रास्ता भी खुद ही खोजना होगा.

4. अलग या दूर रहने के बारे में सोचना
जब हम परिस्थितियों के वशीभूत हो जाते हैं तो यह हमारे मन की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है जिसमें हम दूसरों की बातों को अनसुना करने लगते हैं और किसी ऐसी जगह पर रहना चाहते हैं जहां अशांति और हलचल कम हो अगर आप भी खुद को दूसरों से अलग-थलग पाएं और अकेलापन आपको पसंद आ रहा हो तो आपको निश्चित तौर पर इस स्थिति से बाहर आने के लिए दूसरों की मदद लेनी चाहिए.

5. निराशावादी दृष्टिकोण
किसी भी चीज को पॉजिटिव तरीके से देखने की बजाए मौजूदा समय और आने वाले भविष्य के बारे में निराशावादी सोच रखना और हर परिस्थिति में यही सोचना कि कुछ भी बेहतर नहीं हो सकता- यह सब इसी बात का संकेत है कि आप इमोशनल बर्नआउट की स्थिति में पहुंच गए हैं.

6. फोकस की कमी महसूस होना
अगर आपका ध्यान या फोकस बाकी दिनों में तो बेहतर रहता है लेकिन इस परिस्थिति में आपका दिमाग एक जगह पर स्थिर नहीं है और साथ ही ऊपर बताए गए कई संकेत भी आपको खुद में नजर आ रहे हैं तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए कि कहीं आप भी भावनात्मक थकान के शिकार तो नहीं हो रहे. ऐसे में हमारा सुझाव यही है कि आपको यहां पर रुक जाना चाहिए और सेल्फकेयर यानी खुद की देखभाल की तरफ कदम बढ़ाना चाहिए.