• परंपरा: ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा से ही लोग गंगाजल लेकर निकलते हैं अमरनाथ यात्रा के लिए

ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा को स्कंदपुराण और भविष्यपुराण में पर्व कहा गया है। इस बार ये पूर्णिमा 5 जून, शुक्रवार को पड़ रही है। काशी के ज्योतिषाचार्य पं.गणेश मिश्र के अनुसार इस दिन सिद्ध और सर्वार्थसिद्धि योग बन रहे हैं। जिससे इस पर्व का महत्व और भी बढ़ जाएगा। इन शुभ संयोग में किए गए तीर्थ स्नान और दान का कई गुना फल होता है। इस दिन किए गए पुण्यकर्म से मनोकामनाएं पूरी होती है।

धार्मिक महत्व 
1. भारतीय संस्कृति में ज्येष्ठ पूर्णिमा का बहुत ही महत्त्व है। इस दिन गंगा स्नान कर भगवान विष्णु और सूर्य की पूजा करने से मनोकामना पूरी होती है।
2. इस पूर्णिमा से ही लोग गंगाजल लेकर अमरनाथ यात्रा के लिए निकलते हैं। हालांकि इस बार ये यात्रा होगी या नहीं इस पर अनिश्चितता बनी हुई है।
3. ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा पर ही संत कबीरदास जयंती मनाई जाती है।
4. ज्येष्ठ महीने की पूर्णिमा पर पितरों की विशेष पूजा और ब्राह्मण भोजन करवाया जाता है। इससे पितृ तृप्त होते हैं।
5. सौभाग्य और समृद्धि के लिए इस पर्व पर वट पूजा और सावित्री व्रत किया जाता है।

ज्योतिषीय महत्व
1. इस पर्व पर सूर्य और चन्द्र के बीच 169 से 180 डिग्री का अंतर होता है। जिससे इन ग्रहों के बीच समसप्तक योग बनता है।
2. इस योग में किए गए कामों में सफलता मिलती है।
3. पूर्णिमा के स्वामी स्वयं चन्द्र देव हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्रमा का प्रभाव हमारे मन पर पड़ता है। इसलिए इस तिथि पर मानसिक उथल-पुथल जरूर होती है।
4. पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी सौलह कलाओं से पूर्ण रहता है। इसलिए इस दिन औषधियों का सेवन करने से उम्र बढ़ती है।
5. गुरुवार और पूर्णिमा तिथि से बनने वाले शुभ संयोग में किए गए कामों से सुख, समृद्धि और सौभाग्य मिलता है।