मुंबई. मार्च के आखिरी सप्ताह से ही फिल्म इंडस्ट्री तकरीबन पूरी तरह ठप्प है। सिनेमाघरों में आखिरी रिलीज फिल्म ‘कामयाब’ और ‘अंग्रेजी मीडियम’ थी। अब बमफाड़, घूमकेतु, गुलाबो-सिताबो सिनेमाघरों के बजाए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आ रही हैं। इससे सिनेमाघरों और फिल्म वितरकों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

इंडस्ट्री से जुड़े सभी लोग लॉकडाउन की वजह से बंंद सिनेमाघरों के खुलने का इंतजार कर रहे हैं। इस दौरान अमिताभ-आमिर समेत कई बड़े सितारों की फिल्में कतार में हैं और रिलीज का इंतजार कर रही हैं। ट्रेड एनालिस्ट अतुल मोहन कहते हैं कि एक अनुमान के अनुसार सिनेमाघर मालिकों और फिल्म वितरकों को हर सप्ताह करीब 55 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। यानी हर माह 200 करोड़ रुपए से ज्यादा।

अबतक करीब हजार करोड़ का नुकसान

ट्रेड पंडित राज बंसल कहते हैं कि ‘इंडस्ट्री के नुकसान की बात करें तो इसमें सबसे बड़ा नुकसान सिनेमाघर वालों का है। जुलाई तक सिनेमाघर बंद रहते हैं तो 15 हफ्तों में उन्हें 750 करोड़ से ऊपर का नुकसान हो सकता है। जुलाई के बाद अगर त्योहार के समय भी सिनेमाघर बंद रहते हैं तो निर्माताओं का बड़ा नुकसान होगा।’ फिल्म समीक्षक तरण आदर्श कहते हैं कि लॉकडाउन के चलते मार्च से लेकर अब तक इंडस्ट्री का हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।

बीच का रास्ता निकालना होगा

इस बारे में निर्माता कबीर खान का कहना है कि प्रोड्यूसर्स सिनेमाघर वालों की फिक्र कर रहे हैं। ऐसे में सिनेमाघर वालों को भी प्रोड्यूसर्स की फिक्र करनी चाहिए। एक ऐसा रास्ता निकालना चाहिए, जिससे प्रोड्यूसर्स भी निश्चिंत भाव से अपनी फिल्म सिनेमाघर में लगा सकें और लागत निकाल सकें। बता दें कि सूर्यवंशी, 83 और आमिर खान की बहुप्रतीक्षित फिल्म लाल सिंह चड्ढा सहित करीब 12 ऐसी बड़ी फिल्में हैं, जिन्हें अगर सिनेमाघर खुलने पर रिलीज किया गया तो वे बड़ा मुनाफा दे सकती हैं।

अब सोलो रिलीज मिल पाना मुश्किल

फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोग बताते हैं कि लॉकडाउन नहीं होता तो ज्यादातर बड़े बजट की फिल्मों को सोलो रिलीज मिल रही थी। मगर अब आने वाले महीनों में भीड़ इकट्ठी होगी। एक-एक डेट पर अब दो-दो फिल्में रिलीज होंगी। वह आपस में एक-दूसरे का बिजनेस कम करेंगी। निर्देशक करण मल्होत्रा के मुताबिक, ‘किसी फिल्म को सोलो रिलीज नहीं मिलती है तो उसे डिजिटल प्लेटफॉर्म और सैटेलाइट राइट्स से भी कम ही पैसे मिलते हैं।