• ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार 5 दिनों के इस पंचक काल में दक्षिण दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए.

गुरुवार 11 जून से पंचक शुरू हो रहा है। जो कि 15 जून तक रहेगा। जब चंद्रमा घनिष्ठा से रेवती नक्षत्र तक का सफर तय करता है। तो उन 5 दिनों के समय को पंचक कहा जाता है। ये स्थिति हर महीने बनती है। ज्योतिष के मुहूर्तमार्तंड और चिंतामणि ग्रंथ के अनुसार इन 5 दिनों में दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। ऐसा करने से धन हानि, बीमारी और नुकसान होने की संभावना बनती है।

  • विद्वानों के अनुसार इन नक्षत्रों में गलती से भी ऐसे काम नहीं होने चाहिए जो अशुभ हो। गलती से अशुभ या नुकसान वाले काम हो जाए तो आने वाले दिनों में ऐसी स्थिति बनती है कि फिर से उन कामों को करना पड़ता है। इसलिए इन दिनों में सावधानी रखनी चाहिए।

पंचक के 5 नक्षत्रों का अशुभ प्रभाव
1. धनिष्ठा नक्षत्र में आग लगने का भय रहता है।
2. शतभिषा नक्षत्र में वाद-विवाद होने के योग बनते हैं।
3. पूर्वाभाद्रपद रोग कारक नक्षत्र है यानी इस नक्षत्र में बीमारी होने की संभावना सबसे अधिक होती है।
4. उत्तरा भाद्रपद में धन हानि के योग बनते हैं।
5. रेवती नक्षत्र में नुकसान व मानसिक तनाव होने की संभावना होती है।

मुहूर्त चिंतामणि ग्रंथ के अनुसार पंचक के नक्षत्रों का शुभ फल
1. घनिष्ठा और शतभिषा नक्षत्र चल स्वभाव वाले माने जाते हैं। यानी इनमें ऐसे काम करने चाहिए जो चलते रहते हैं। जैसे- यात्रा करना, वाहन खरीदना, मशीनरी संबंधित काम शुरू करना।
2. उत्तराभाद्रपद नक्षत्र स्थिर स्वभाव माना गया है। इसमें ऐसे काम किए जाने चाहिए जो स्थायी होते हैं। जैसे- बीज बोना, गृह प्रवेश, शांति पूजन और जमीन से जुड़े स्थिर कार्य।
3. रेवती नक्षत्र मैत्री संज्ञक होने से इस नक्षत्र में कपड़े, व्यापार से संबंधित सौदे करना, किसी विवाद का निपटारा करना और गहने खरीदने जैसे काम करना शुभ माना जाता है।

ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार पंचक में सावधानी
1. इन 5 दिनों में चारपाई या पलंग की खरीदारी नहीं करनी चाहिए। बनवाना भी नहीं चाहिए। विद्वानों के अनुसार ऐसा करने से घर में बीमारियां और क्लेश होता है।
2. इन 5 दिनों के दौरान जिस दिन घनिष्ठा नक्षत्र हो, उस समय घास, लकड़ी और जलने वाली चीजें इकट्ठी नहीं करना चाहिए। इससे आग लगने की संभावना बढ़ जाती है।
3. पंचक के दौरान दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि ये यम की दिशा मानी गई है। इन 5 दिनों में दक्षिण दिशा की यात्रा करने से नुकसान हो सकता है।
4. विद्वानों का कहना है कि इन 5 दिनों में जब चंद्रमा रेवती नक्षत्र में हो तब घर की छत नहीं बनाना चाहिए। इससे धन हानि और घर में क्लेश होता है।
5. इन 5 दिनों में अगर किसी का अंतिम संस्कार करना पड़े तो किसी विद्वान की सलाह जरूर लेनी चाहिए। ऐसा न हो पाए तो शव के साथ आटे या कुश (एक प्रकार की घास) के पांच पुतले बनाकर अर्थी पर रखना चाहिए और इन पांचों का भी शव की तरह विधि-विधान से अंतिम संस्कार करना चाहिए। इससे पंचक दोष खत्म हो जाता है।