कोरोना वायरस की लेटेस्ट अपडेट

 

 

नेशनल कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि कोरोना मरीजों को यदि कैंसर की दावा दी जाए तो उनके इलाज में काफी हद तक मदद मिल सकती है.

 

कोरोना वायरस (Covid 19) के कहर से विश्व के कई देश परेशान हैं. वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं में कोरोना वायरस के लिए वैक्सीन बनाने में लगे हैं और कुछ दवाइयों के जरिए इस बीमारी की तकलीफ कम करने की कोशिशें जारी हैं. अमेरिका में वैज्ञानिकों ने कोरोना मरीजों पर एक ऐसी दवा का टेस्ट किया है जिसे कि उन्हें कुछ राहत मिली है. कोरोना (Coronavirus) के मरीजों को सांस लेने में काफी तकलीफ होती है और सांसे फूलती हैं.

 

इस सिलसिले में नेशनल कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि कोरोना मरीजों को यदि कैंसर की दावा दी जाए तो उनके इलाज में काफी हद तक मदद मिल सकती है. उनका कहना है कि कोरोना मरीजों को अगर ब्लड कैंसर की दवा दी जाए तो सांस लेने में मरीजों को जो तकलीफ हो रही है उसे काफी हद तक कम किया जा सकता है. इससे मरीजों के रोग प्रतिरक्षा तंत्र पर कंट्रोल करने में मदद मिलती है. दरअसल, जिन लोगों का इम्यून सिस्टम ज्यादा सक्रिय होता है उनमें कोरोना इन्फेक्शन के चांसेस काफी बढ़ जाते हैं.

अमर उजाला ने साइंस इम्यूनोलॉजी जर्नल में प्रकाशित शोध के हवाले से छापा है कि कैंसर की दवा ‘एकैलब्रूटिनिब’ कोरोना मरीजों में बीटीके प्रोटीन यानी ब्रूटॉन टायरोसिन काइनेज को ब्लॉक करती है. बीटीके प्रोटीन रोग प्रतिरक्षा तंत्र के लिए भी काफी महत्वपूर्ण होता है. जब रोग प्रतिरक्षा तंत्र ज्यादा एक्टिव होता है तो यह बॉडी को इन्फेक्शन से बचाने के लिए शरीर में सूजन पैदा कर देता है.

हालांकि साइंस इम्यूनोलॉजी जर्नल में प्रकाशित शोध में यह लिखा है कि आम तौर पर क्लीनिकल प्रैक्टिस के लिए इस दवा के इस्तेमाल से परहेज करना चाहिए. क्योंकि अभी यह स्टडी शुरूआती तौर पर कुछ मरीजों पर ही हुई है ऐसे में सब पर इसका ट्रायल नहीं किया जा सकता है. इस दवा का इस्तेमाल मरीज के हालात के हिसाब से किया जाना चाहिए.